सन् 1892 से पहले से
हमारा इतिहास
ग्राम सताँव, रायबरेली का श्री ठाकुर जी मंदिर सन् 1892 से पहले निर्मित हुआ था। मंदिर का निर्माण श्री लक्ष्मी नारायण दीवान जी ने कराया। इसकी सटीक तिथि आज ज्ञात नहीं है, पर मंदिर की सेवा की परंपरा तब से निरंतर चली आ रही है।
हमारे पूर्वज
मंदिर में लगे शिलालेख हमारे पूर्वजों की स्मृति को आज भी सँजोए हुए हैं। एक शिलालेख श्री हरिहर लाल जी श्रीवास्तव, गुलाब राय जी, रिसाल लाल जी, जवाहिर लाल जी, धौंकल लाल जी और बखतावर लाल जी की पुण्यस्मृति में स्थापित है।
शिलालेखों में चित्रगुप्त वंश के श्री दीवान बखतावर लाल जी का जन्म संवत् 1900 (लगभग सन् 1843) और स्वर्गवास संवत् 1983 (लगभग सन् 1926) अंकित है। इन्हें उनके पुत्र और सेवक श्री लक्ष्मी नारायण दीवान जी ने स्थापित कराया।
श्री लक्ष्मी नारायण दीवान जी के बाद उनके पुत्र श्री राम भगत जी ने मंदिर और संस्था की देखरेख संभाली। उनके बाद उनके पुत्र श्री विजय प्रकाश श्रीवास्तव जी ने यह दायित्व संभाला।
भक्त प्रेम मंडल से श्री ठाकुर जी ट्रस्ट समिति तक
दशहरा मंचन की परंपरा सन् 1900 में आरंभ हुई। उस समय संस्था का नाम भक्त प्रेम मंडल था, जो केवल दशहरा कार्यक्रम के लिए कार्य करती थी और स्वयं को धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के रूप में जानती थी। सन् 2014 का दशहरा भी इसी नाम से हुआ। बाद में यह आयोजन श्री ठाकुर जी ट्रस्ट समिति (रजि.) के अंतर्गत आ गया। चार-पाँच पीढ़ियों से हमारे पूर्वज और उनकी संतानें इस संस्था का संचालन करते आ रहे हैं।
सन् 1900 से दशहरा का आयोजन हर वर्ष बिना किसी रुकावट के हुआ है। कोरोना काल में भी सीमित प्रतिबंधों के साथ रावण वध का मंचन किया गया। सन् 2026 में श्री गीत श्रीवास्तव जी की स्मृति में सीमित कार्यक्रम हुआ, जिसमें कोई फिल्मी मंचन नहीं किया गया।
संस्था के उद्देश्य
- मंदिर की देखरेख एवं उससे जुड़े सभी धार्मिक आयोजनों, जैसे राम नवमी, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, नवरात्रि, दशहरा, दीपावली, हनुमान जयंती, शिवरात्रि आदि कार्यक्रमों की व्यवस्था करना।
- ग्रामीण कला को प्रोत्साहन एवं संरक्षण देना।
- स्वस्थ मनोरंजन एवं नैतिक मूल्यों की स्थापना करना।
- धार्मिक सहिष्णुता एवं वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को विकसित करना।
- आपसी एकता एवं सद्भावना बनाए रखना।
- शिक्षाप्रद धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और सामाजिक नाटकों का मंचन करना।
आज यह संस्था वर्ष भर के उत्सवों का आयोजन करती है, जिनमें तीन-चार दिन का दशहरा महोत्सव सबसे बड़ा है। इसमें दूर-दूर से लोग सताँव आकर एक साथ उत्सव मनाते हैं।