आश्विन
दशहरा महोत्सव
तीन-चार दिन का भव्य आयोजन: ट्रैक्टरों का जुलूस, रामायण मंचन, ऐतिहासिक मंचन और फिल्मी मंचन।
दशहरा की तैयारी
दशहरा केवल मंच पर होने वाला आयोजन नहीं, पूरे गाँव का सामूहिक प्रयास है। समिति के सदस्य बैठकों में योजना बनाते हैं, महिलाएँ ढोलक के साथ गीत गाती हैं, ग्रामवासी मिलकर मंच खड़ा करते हैं और कलाकार वेशभूषा व श्रृंगार के साथ तैयार होते हैं। फिर शोभायात्रा गाँव की गलियों से निकलती है और रात में मंच पर नाटक होते हैं, जिन्हें देखने बड़ी संख्या में दर्शक जुटते हैं।
पिछले वर्षों के कार्यक्रम
सन् 2026
13 अगस्त 2026 को श्री गीत श्रीवास्तव जी के निधन के कारण उनकी स्मृति में इस वर्ष दशहरा का सीमित कार्यक्रम हुआ और कोई फिल्मी मंचन नहीं किया गया।
सन् 2019
- 8 अक्टूबर: भव्य शोभायात्रा एवं रावण वध
- 9 अक्टूबर: नाटक मंचन, छत्रपति शिवाजी
- 10 अक्टूबर: नाटक मंचन, शूल
सन् 2014
- 3 अक्टूबर: भव्य शोभायात्रा
- 4 अक्टूबर: अश्वत्थामा (ऐतिहासिक लघुनाटिका) और अण्डे के छिलके (हास्य लघुनाटिका)
- 5 अक्टूबर: सरफरोश (फिल्मी नाटक)
- 6 अक्टूबर: सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र (धार्मिक नाटक)
इन दोनों वर्षों में कार्यक्रम स्थल इरा ज्ञान सरोवर मॉन्टेसरी स्कूल, सताँव रहा।
कार्यक्रम
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जुलूस
अनेक ट्रैक्टरों पर सजी झाँकियों के साथ भव्य शोभायात्रा, जिसे देखने पूरा क्षेत्र उमड़ता है।
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रामायण मंचन
सीता वाटिका से रावण वध तक की कथा का मंच पर सजीव प्रस्तुतीकरण।
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ऐतिहासिक मंचन
शिवाजी, पृथ्वीराज चौहान, अमर सिंह राठौड़ जैसे वीरों की गाथाएँ।
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फिल्मी मंचन
बाहुबली से मुग़ल-ए-आज़म तक, प्रसिद्ध फिल्मों का मंच के लिए तैयार रूपांतरण।
डॉक्यूमेंट्री
भक्त प्रेम मंडल की इस 40 मिनट की डॉक्यूमेंट्री में मंदिर, शिलालेख, पूर्वजों के पुराने चित्र, समिति की बैठकें, महिलाओं के ढोलक गीत, मंच की तैयारी, शोभायात्रा, नाटक और ग्रामवासियों से बातचीत के माध्यम से सताँव के दशहरा की कहानी देखिए।
छायांकन, सम्पादन व निर्देशन: शर्मिष्ठा श्रीवास्तव
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