सताँव, रायबरेली · स्थापना सन् 1900
श्री ठाकुर जी ट्रस्ट समिति
सन् 1900 से हर वर्ष, बिना रुके: ग्राम सताँव की आस्था, परंपरा और दशहरा
हमारी कहानी
1892 से पहले बना मंदिर, 1900 से चलता दशहरा
ग्राम सताँव का श्री ठाकुर जी मंदिर सन् 1892 से पहले श्री लक्ष्मी नारायण दीवान जी ने बनवाया। सन् 1900 में भक्त प्रेम मंडल के नाम से दशहरा मंचन आरंभ हुआ, जो बाद में श्री ठाकुर जी ट्रस्ट समिति के अंतर्गत आया। उनके बाद श्री राम भगत जी और फिर श्री विजय प्रकाश श्रीवास्तव जी ने यह दायित्व संभाला। कोरोना काल में भी रावण वध का मंचन हुआ और यह परंपरा कभी नहीं रुकी।
पूरा इतिहास पढ़ेंराम के बिना ये तन मेरा बेकाम है,
चीरता हूँ देख लो रग रग में मेरे राम हैं।
हर वर्ष का सबसे बड़ा आयोजन
दशहरा: तीन-चार दिन, एक पूरा गाँव एक मंच पर
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जुलूस
अनेक ट्रैक्टरों पर सजी झाँकियों के साथ भव्य शोभायात्रा, जिसे देखने पूरा क्षेत्र उमड़ता है।
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रामायण मंचन
सीता वाटिका से रावण वध तक की कथा का मंच पर सजीव प्रस्तुतीकरण।
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ऐतिहासिक मंचन
शिवाजी, पृथ्वीराज चौहान, अमर सिंह राठौड़ जैसे वीरों की गाथाएँ।
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फिल्मी मंचन
बाहुबली से मुग़ल-ए-आज़म तक, प्रसिद्ध फिल्मों का मंच के लिए तैयार रूपांतरण।
डॉक्यूमेंट्री
भक्त प्रेम मंडल की इस 40 मिनट की डॉक्यूमेंट्री में मंदिर, शिलालेख, पूर्वजों के पुराने चित्र, समिति की बैठकें, महिलाओं के ढोलक गीत, मंच की तैयारी, शोभायात्रा, नाटक और ग्रामवासियों से बातचीत के माध्यम से सताँव के दशहरा की कहानी देखिए।
छायांकन, सम्पादन व निर्देशन: शर्मिष्ठा श्रीवास्तव
हमारा YouTube चैनलकृतज्ञता के साथ
संस्था के लिए समर्पित
- श्री लक्ष्मी नारायण दीवान जीस्वर्गीय
- श्री राम भगत जीस्वर्गीय
- श्री विजय प्रकाश श्रीवास्तव जी
- श्री राम प्रसाद श्रीवास्तव जीस्वर्गीय
- श्री बिन्दादीन पाण्डेय जीस्वर्गीय
- श्री निर्मल प्रकाश श्रीवास्तव जी
- श्री अरविन्द श्रीवास्तव जी
- श्री गीत श्रीवास्तव जीस्वर्गीय, 13 अगस्त 2026
- श्री सरजू प्रसाद श्रीवास्तव जी
मंदिर के विग्रह
पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ती आस्था
- श्री राम-लक्ष्मण-सीता जी
- शिवलिंग
- संतोषी माता जी
- माँ दुर्गा जी
- हनुमान जी
- श्री कृष्ण-राधा जी
- गुरु जी
- गणेश जी
चित्र
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