श्री ठाकुर जी ट्रस्ट समितिसताँव, रायबरेली (रजि.)

सताँव, रायबरेली · स्थापना सन् 1900

श्री ठाकुर जी ट्रस्ट समिति

सन् 1900 से हर वर्ष, बिना रुके: ग्राम सताँव की आस्था, परंपरा और दशहरा

126वर्ष, बिना रुके
4-5पीढ़ियों की सेवा
8स्थापित विग्रह
7वार्षिक उत्सव

हमारी कहानी

1892 से पहले बना मंदिर, 1900 से चलता दशहरा

ग्राम सताँव का श्री ठाकुर जी मंदिर सन् 1892 से पहले श्री लक्ष्मी नारायण दीवान जी ने बनवाया। सन् 1900 में भक्त प्रेम मंडल के नाम से दशहरा मंचन आरंभ हुआ, जो बाद में श्री ठाकुर जी ट्रस्ट समिति के अंतर्गत आया। उनके बाद श्री राम भगत जी और फिर श्री विजय प्रकाश श्रीवास्तव जी ने यह दायित्व संभाला। कोरोना काल में भी रावण वध का मंचन हुआ और यह परंपरा कभी नहीं रुकी।

पूरा इतिहास पढ़ें

राम के बिना ये तन मेरा बेकाम है,
चीरता हूँ देख लो रग रग में मेरे राम हैं।

हर वर्ष का सबसे बड़ा आयोजन

दशहरा: तीन-चार दिन, एक पूरा गाँव एक मंच पर

  1. जुलूस का दृश्य

    जुलूस

    अनेक ट्रैक्टरों पर सजी झाँकियों के साथ भव्य शोभायात्रा, जिसे देखने पूरा क्षेत्र उमड़ता है।

  2. रामायण मंचन का दृश्य

    रामायण मंचन

    सीता वाटिका से रावण वध तक की कथा का मंच पर सजीव प्रस्तुतीकरण।

  3. ऐतिहासिक मंचन का दृश्य

    ऐतिहासिक मंचन

    शिवाजी, पृथ्वीराज चौहान, अमर सिंह राठौड़ जैसे वीरों की गाथाएँ।

  4. फिल्मी मंचन का दृश्य

    फिल्मी मंचन

    बाहुबली से मुग़ल-ए-आज़म तक, प्रसिद्ध फिल्मों का मंच के लिए तैयार रूपांतरण।

दशहरा के बारे में और जानें

डॉक्यूमेंट्री

भक्त प्रेम मंडल की इस 40 मिनट की डॉक्यूमेंट्री में मंदिर, शिलालेख, पूर्वजों के पुराने चित्र, समिति की बैठकें, महिलाओं के ढोलक गीत, मंच की तैयारी, शोभायात्रा, नाटक और ग्रामवासियों से बातचीत के माध्यम से सताँव के दशहरा की कहानी देखिए।

छायांकन, सम्पादन व निर्देशन: शर्मिष्ठा श्रीवास्तव

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कृतज्ञता के साथ

संस्था के लिए समर्पित

समिति और सदस्य

मंदिर के विग्रह

पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ती आस्था

  1. श्री राम-लक्ष्मण-सीता जी
  2. शिवलिंग
  3. संतोषी माता जी
  4. माँ दुर्गा जी
  5. हनुमान जी
  6. श्री कृष्ण-राधा जी
  7. गुरु जी
  8. गणेश जी
मंदिर के बारे में

चित्र

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वर्ष भर के अन्य उत्सव

वसंत पंचमीमहाशिवरात्रिराम नवमीबड़ा मंगलश्री कृष्ण जन्माष्टमीगणेश चतुर्थी

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पुजारी जी का वेतन, प्रतिदिन की पूजा सामग्री और सुंदरकांड पाठ आपके इच्छानुसार सहयोग से चलते हैं।

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